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    ओशो की पुकार

                      ओशो की पुकार!!!

    मेरे प्रिय आत्मन।
    अमरीकन बेड़ियां तो मुझे जकड़ न सकीं तथा उनके कैदखाने मुझे कैद न कर सके और न उनका जहर मुझे मार सका!!

    पर अपने ही लोगों ने विश्वासघात कर मेरी हत्या की और जालसाजी के द्वारा अब मुझे कॉपीराइट की बेड़ियों में जकड़कर कैद कर दिया है!!

    अब मुझे कॉपीराइट रूपी राहू के ग्रहण से मुक्त कराने का दायित्व मेरे एक-एक सन्यासी का है, और आप सभी का है जो मुझसे प्रेम करते हैं !!
    बात सन 2000 की है ओशो की बहन रसा (मां योग भक्ति) जो उनसे 2 साल छोटी थीं जिन्हें ओशो बहुत प्रेम करते थे। वे ओशोधारा का कार्यक्रम करने नेपाल पहुंची। और वहां पर उन्होंने गुरुदेव "सिद्धार्थ औलिया" जी को एक घटना सुनाई जो उनको पिछले कई सालों से निरंतर बेचैन कर रही थी।

    मां रसा :- स्वामी जी! ओशो के शरीर छोड़ने के लगभग 4 महीने बाद मुझे एक विज़न (दिव्य स्वप्न) आया था। जिसमें मैने देखा कि ओशो एक कैदखाने में कैद हैं और पुकार रहे हैं मुझे मुक्त करो, मुझे मुक्त करो!!!
    स्वामी जी मैं जानना चाहती हूं कहीं ओशो को किन्हीं नकारात्मक शक्तियों ने तो नहीं कैद कर लिया है!!
    कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।

    गुरुदेव सिद्धार्थ औलिया :-  वह स्वप्न रंगीन था कि ब्लैक & वाइट!

    मां रसा :-  रंगीन था स्वामी जी।

    गुरुदेव सिद्धार्थ औलिया :-  तो निश्चित ही वह विज़न ही था।
    परन्तु ओशो जैसी विराट चेतना को कोई भी नकारात्मक शक्तियां; भूत-प्रेत इतर स्पर्श भी नहीं कर सकते। अतः इस शंका से आप पूरी तरह से निश्चिंत रहें।

    गुरूदेव बताते हैं कि उस समय तो मुझे इस विज़न का रहस्य ख्याल में नही आया।
    पर अब वस्तुस्थिती बिल्कुल स्प्ष्ट है।
    जिस तरह ओ.आई.एफ (ओशो इंटरनैशनल फाउंडेशन) ने ओशो के दर्शन, ओशो के नाम, फोटों, विचार आदि उनके पूरे कार्य को कॉपीराइट के द्वारा  कैद कर लिया है वह विज़न उसी तरफ इशारा था।

    (दिव्य स्वप्न, विज़न के बारे में ओशो ने पतंजलि योगसूत्र में विस्तार से बताया है।)

    ओ.आई.एफ (ओशो इंटरनैशनल फाउंडेशन) की कॉपीराइट की जालसाजी और षडयंत्र पर गौर करें:-
           
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    "OSHO International Foundation  ओशो, जो ऑडियो, वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक, मल्टीमीडिया और लिखित रूपों सहित सभी माध्यमों में लेखक हैं, के सभी प्रकाशित और अप्रकाशित शब्दों और कार्यों, जो लेखक की सम्पूर्णतया मौलिक कृतियाँ थीं, साथ ही साथ लेखक की तस्वीरों के सभी कॉपीराइट का एकमात्र और पंजीकृत स्वामी है; और विविध व्युत्पन्न कार्यों और अन्य लेखन, संगीत, कला और अन्य निर्मित उत्पादों जो लेखक द्वारा ही रचित हैं या फिर किसी न किसी रूप में उनसे ही जुड़े हुए हैं के कॉपीराइट का स्वामी है। "

    मां अमृत साधना कहती हैं, 'कोर्ट में बातें नहीं, सबूत चलते हैं और हमारे पास कॉपीराइट के सबूत हैं। ओशो ने इन सभी चीजों का खुद ही कॉपीराइट कराया था। उन्होंने ऐसा इसलिए किया था ताकि उनके जाने के बाद कोई इससे छेड़छाड़ न कर पाए। वॉशिंगटन में 'लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस' में ओशो खुद गए थे और वहां एक-एक चीज का कॉपीराइट कराया, चाहे वह उनकी पेंटिग्स हो, ऑडियो-विडियो प्रवचन, मेडिटेशन या उनका संगीत।

    स्वामी चैतन्य कीर्ति जी 'जो कभी ओशो के P.R का काम संभालते थे तथा ओशो की पुस्तकों और पत्रिकाओं के प्रकाशन और संपादन से भी जुड़े रहे हैं वे कहते हैं:-  ओशो ने कभी कॉपीराइट के लिए कोशिश नहीं की, यह बात पूरी तरह गलत है। ओशो ने कभी खुद जाकर किसी ऑफिस में कॉपीराइट नहीं कराया। ओशो के समय में शीला ही इस तरह के काम देखती थीं। अगर कहीं जाना होता था तो वही जाती थीं। ओशो कभी खुद किसी कार्यालय में नहीं गए। ओशो तो कोरे कागज और अपने लेटर हेड्स पर सिग्नेचर करके रख देते थे। उन्हें अपने लोगों पर पूरा भरोसा था। उन्होंने उन्हें पूरी आजादी दी थी। हां, यह मुमकिन है कि इसका कुछ गलत इस्तेमाल भी हुआ हो। सच यह है कि खुद ओशो ने कभी कॉपीराइट के लिए कोशिश नहीं की। और एक सच तो यह भी है कि अमृत साधना उस समय थीं ही नहीं। हमने तो कॉपीराइट इसलिए रखा था ताकि वैधानिक चुनौती बनी रहे।"

    पूना आश्रम के उनके खास करीबी सन्यासियों ने ओशो के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है और इसका सबसे बड़ा कारण यही था कि वे अपने सन्यासियों को अथाह प्रेम और उन पर अटूट भरोसा करते थे।
    पर मानव मन अभी तक विकसित नहीं हो पाया है हम अभी तक आदिम ही हैं और हम वही इतिहास की गलतियां बारबार दोहराते रहते हैं...।
    अतीत के सभी बुध्दपुरुषों के साथ उनके ही नज़दीकी, उनके विशेष प्रिय लोगों ने ही धोखा दिया और वही ओशो के साथ फिर दोहराया गया है!

    ओशो जैसा अनूठा सद्गुरु अतीत में नहीं हुआ क्योंकि जिस तरह से सन्यास का महादान बेशर्त बिना पात्रता की परीक्षा लिए उन्होंने दोनों हाथों से लुटाया है वह आज तक मानवता के इतिहास में कभी नहीं हुआ था। यह उनकी महाकरुणा को दर्शाता है।
    जिस कारण धीरे-धीरे उनके आसपास अपराधिक प्रवत्ति के शिष्य इकट्ठे हो गए और उनकी नज़र ओशो के विशाल साम्राज्य पर एकाधिकार कर उसे हड़पने की हो गयी।
    और इन सबने मिलकर बड़ा ही घिनौना अक्षम्य षड्यंत्र किया, उनकी आध्यात्मिक सम्पदा पर अधिकार करने के लिए उनकी हत्या की और झूठे साक्ष्य देकर उनके विराट योगदान को copyright के नाम पर अपनी निजी संपत्ति बना लिया।
    जो पूरी तरह से झूठ और जालसाजी पर आधारित है।
    यह जांच का विषय है और बहुत शीघ्र ही पूरे विश्व के सामने उन हत्यारों और धूर्त शिष्यों के नाम और उनके कुकृत्य उजागर होंगें।

    ओशो की मौत पर 'हू किल्ड ओशो' क़िताब लिखने वाले अभय वैद्य कहते हैं, "19 जनवरी, 1990 को ओशो आश्रम से डॉक्टर गोकुल गोकाणी को फोन आया। उनको कहा गया कि आप अपना लेटर हेड और इमरजेंसी किट लेकर आएं।"

    डॉक्टर गोकुल गोकाणी ने अपने हलफनामे में लिखा है, "वहां मैं करीब दो बजे पहुंचा। उनके शिष्यों ने बताया कि ओशो देह त्याग कर रहे हैं। आप उन्हें बचा लीजिए। लेकिन मुझे उनके पास जाने नहीं दिया गया। कई घंटों तक आश्रम में टहलते रहने के बाद मुझे उनकी मौत की जानकारी दी गई और कहा गया कि डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दें।"

    डॉक्टर गोकुल ओशो की मौत की टाइमिंग को लेकर भी सवाल खड़े करते हैं। डॉक्टर ने अपने हलफ़नामे में ये भी दावा किया है कि ओशो के शिष्यों ने उन्हें मौत की वजह दिल का दौरा लिखने के लिए दबाव डाला।

    ओशो के आश्रम में किसी संन्यासी की मृत्यु को उत्सव की तरह मनाने का रिवाज़ था। लेकिन जब खुद ओशो की मौत हुई तो इसकी घोषणा के एक घंटे के भीतर ही आनन-फानन में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया और उनके महापरिनिर्वाण का उत्सव भी जल्दी से निपटा दिया गया।

    मां नीलम जो ओशो की सचिव रह चुकी थीं उन्होंने एक इंटरव्यू में उनकी मौत से जुड़े रहस्यों पर कहा था कि ओशो के निधन की सूचना उनकी मां को भी देर से दी गई थी (जबकि ओशो की मां भी आश्रम में ही रहती थीं)। तथा उनके परिवार के सदस्यों को भी उनके शरीर के पास जाने नहीं दिया गया था। मां नीलम जी यह भी बताती हैं कि ओशो की मां लंबे समय तक यह कहती रहीं कि 'बेटा उन्होंने तुम्हें मार डाला।'

    इनके षड्यंत्रों को और अधिक विस्तार से जानने के लिए निम्न किताबें पढ़ें।
    1.   'हू किल्ड ओशो'
          लेखक ~ अभय वैद्य

    सभी ओशो प्रेमियों का आवाहन है भले ही हमारे आपस में वैचारिक मतभेद हों पर एक विषय पर हम सभी एकमत हैं कि प्यारे ओशो किसी भी व्यक्ति, संस्था की निजी सम्पत्ति नहीं हो सकते, वे पूरी मानवता के लिए हैं। उन धूर्त लोगों के कुत्सित षड्यंत्रों के खिलाफ हम सभी को खड़ा होना चाहिए तथा अब ओशो को कॉपीराइट के दावानल से मुक्त कराना और उनके हत्यारों का पर्दाफाश करा कर उन्हें दंड दिलाने का दायित्व भी अब हमारा ही है। और यही हम सभी शिष्यों की तरफ से अपने प्यारे सदगुरु को सर्वश्रेष्ठ गुरु-दक्षिणा होगी।
    आइये हम सब मिलकर इन धन-पद लोलुप, गुरुघातियों के विरुद्ध विराट आंदोलन करें! और इनके षड्यंत्रों का पर्दाफाश कर अपने प्यारे सद्गुरु को कॉपीराइट की कैद से मुक्त कराएं!!
    और अब इसका सही वख्त आ गया है।

                                          ~ जागरण सिद्धार्थ




    14 comments:

    1. Very steek and true written.
      Mangalashis!!

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    2. स्वामी जी आपने बहुत ही हृदय विदारक घटना का उल्लेख करके मन को द्रवित कर दिया अफसोस ये है कि सारी दुनिया मे फैले ओशो के सन्यासी इस ओर ध्यान क्यों नही दे रहे बात सिर्फ परमगुरु ओशो की आध्यात्मिक सम्पदा के कॉपीराइट भर की नही है ओशो की हत्या की पुनः सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, सीबीआई या अन्य इंटेलीजेंस सर्विसेज से करवाने की गंभीरता से कोशिश होनी चाहिए तभी उनकी आकस्मिक मृत्यु या हत्या के रहस्य से पर्दा उठ सकता है और तभी उनकी आध्यात्मिक सम्पदा के कॉपीराइट पर भी पुनः विचार हो सकता है,भूतकाल में भारत की सरकारों से ये उम्मीद भले न रही हो परन्तु वर्तमान समय काफी अनुकूल है और हम सबको मिलकर एक सामूहिक प्रयास अवश्य करना चाहिए । अगर मेरी बात ओशो जगत के सभी सन्यासी ठीक समझें तो इस पर अपनी राय अवश्य दें ताकि इस ओर हम सब मिलकर अपने कदम बढ़ा सकें और अपने प्यारे परमगुरु के आशीर्वाद से मिली अमूल्य निधि का कुछ कर्ज चुका सकें ।
      गुरुदेव के चरणों मे अहोभाव सहित नमन,
      स्वामी अमृत कीर्ति
      कानपुर

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    3. प्रमाण स्वामी जी हम सभी साथ हैं।
      ����प्रणाम����
      ��������������

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    4. प्रमाण स्वामी जी हम सभी साथ हैं।
      🌷🌷प्रणाम🌷🌷
      🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

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    5. "Jai Satguru"
      "Jai Osho"
      "Jai Oshodhara"

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      Replies
      1. Duniya mein kitnne hee dharam hain aur bahut hee Guru hein.Kisi ne bhee copy right ka daawa nahi kiya Sab apna apna karya kar rahe hain.Hum apke sath hain Gurudev

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      2. निश्चित ही परम गुरु ओशो को कॉपीराइट की कैद से मुक्त कराना अति आवश्यक है...अगर कॉपीराइट की कैद से मुक्त नहीं कराया गया तो संपूर्ण मानव जाति का बहुत अहित हो जाएगा.. कृपया परम गुरु ओशो के सच्चे प्रेमी सामने आकर परम गुरु ओशो की सभी अध्यात्मिक संपत्ति को कॉपीराइट से मुक्त कराएं..

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    6. Swami Gyanamrit : अत्यंत दुःखद समाचार l तत्कालीन भारत सरकार तक ये बात जरूर पहुंचाना चाहिए l Technical Team से मैं आग्रह करना चाहता हूं कि इस पूरी लेख को Narendra Modi app पर upload करें और हो सके तो अपने twitter handle से Prime Minister Modi और Ravi Shankar जी को अवगत कराएं l

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    7. I am against copyright. Param Guru Osho has shared freely whatever he experienced to all.

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    8. Athah prem milane par bhi kya koi itana khudgarz hai ki paramatma ko bhi kaid karane ka sahas ho sakata,jinhone Param guru Osho ko dekha wo kaise ye sab kar sakate hai,kya mukt gagan ko bhi seema me badha ja sakata hai .
      Jai sadguru ji
      Jai Osho🙏
      Jai oshodhara

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